Tuesday, January 21, 2020

इरफ़ान ख़ान बीमारी के बाद 'अंग्रेज़ी मीडियम' से करेंगे वापसी

अभिनेता इरफ़ान ख़ान लंबी बीमारी के बाद बड़े पर्दे पर वापसी करने जा रहे हैं. वह जल्दी ही 'अंग्रेज़ी मीडियम' फ़िल्म में नज़र आएंगे.

होमी अदजानिया के निर्देशन में बनी फ़िल्म 'अंग्रेज़ी मीडि‍यम' इरफ़ान के साथ करीना कपूर ख़ान नज़र आएंगी. इससे पहले डायरेक्टर साकेत चौधरी ने इरफ़ान ख़ान और सबा क़मर के साथ 'हिंदी मीडियम' का निर्देशन किया था.

हिंदी मीडियम फ़िल्म के रिलीज़ का बेसब्री से इंतज़ार किया जा रहा है. यह फ़िल्म इसी साल 20 मार्च को रिलीज़ होगी.

अपनी बीमारी के बारे में इरफ़ान ने ट्वीट करके सूचित किया था.

बाद में उन्होंने अपने मित्रों और पत्रकार अजय ब्रह्मात्मज को चिट्ठी लिखकर अपनी बीमारी के बारे में बताया था.

उन्होंने लिखा था "कुछ महीने पहले अचानक मुझे पता चला था कि मैं न्यूरोएन्डोक्राइन कैंसर से ग्रस्त हूं, मैंने पहली बार यह शब्द सुना था. खोजने पर मैंने पाया कि मेरी इस बीमारी पर बहुत ज़्यादा शोध नहीं हुए हैं, क्योंकि यह एक अजीब शारीरिक अवस्था का नाम है और इस वजह से इसके उपचार की अनिश्चितता ज़्यादा है."

इसके अलावा और भी कुछ फ़िल्में इस साल पर्दे पर धमाल मचाने की तैयारी में हैं.

इम्तियाज़ अली अपनी ही फ़िल्म ''लव आज कल'' का रीमेक लेकर आ रहे हैं.

सैफ़ बोले, 'तानाजी' में जो दिखाया गया वो ख़तरनाक

साल 2009 की लव आज कल में दीपिका पादुकोण के साथ सैफ़ अली ख़ान थे. इस रीमेक में सैफ़ अली ख़ान की बेटी सारा अली ख़ान और कार्तिक आर्यन साथ नज़र आएंगे. लव आज कल की रीमेक 'प्यार के महीने में' इसी साल 14 फ़रवरी को रिलीज़ होगी.

आमिर ख़ान की फ़िल्म लाल सिंह चड्ढा भी इस साल रिलीज़ होगी. यह फ़िल्म साल 1994 में आई हॉलीवुड फ़िल्म 'फॉरेस्ट गंप' का रीमेक है. इस फ़िल्म में आमिर के साथ करीना कपूर ख़ान और मोना सिंह भी मुख्य भूमिका में नज़र आएंगे. फ़िल्म इस साल क्रिसमस पर रिलीज़ होगी.

सारा अली ख़ान और वरुण धवन स्टारर कुली नंबर वन साल 1995 में आई कुली नंबर वन की रीमेक है.

डेविड धवन के निर्देशन में बनी इस फ़िल्म में गोविंदा और करिश्मा कपूर लीड रोल में थे. सारा अली ख़ान और वरुण धवन की यह रीमेक 1 मई 2020 को बड़े पर्दे पर रिलीज़ होगी.

फ़िल्म जर्सी तेलुगू मूवी जर्सी का रीमेक है. इसमें शाहिद कपूर लीड रोल में हैं.

शाहिद के साथ पंकज त्रिपाठी और जैकी श्रॉफ़ भी फ़िल्म में नज़र आएंगे. ये फ़िल्म 28 अगस्त 2020 को रिलीज़ होगी.

इन फ़िल्मों से इतर 2020 में दीपिका पादुकोण, कंगना रनौत, अक्षय कुमार, अमिताभ बच्चन, सलमान ख़ान जैसे बड़े सितारों की फ़िल्में रिलीज़ होनी हैं.

पारंपरिक तौर पर सलामन की फ़िल्में ईद पर रिलीज़ होती हैं. लेकिन इस बार अक्षय कुमार की 'लक्ष्मी बॉम्ब' और सलमान की 'राधे' एक ही दिन मई में ईद पर रिलीज़ होंगी.

लक्ष्मी बॉम्ब में अक्षय पहली बार एक ट्रांसजेंडर का रोल कर रहे हैं और ये तमिल हॉरर कॉमेडी फ़िल्म कंचना ( 2011) की रीमेक है.

अक्षय उन अभिनेताओं में से हैं जो साल में 3-4 फ़िल्में करने के फ़ॉर्मूले पर काम करते हैं. लक्ष्मी बॉम्ब से पहले मार्च में उनकी एक्शन फ़िल्म सूर्यवंशी आएगी जो फ़िल्म सिंबा को आगे बढ़ाएगी- और कैमिओ में दिखेंगे सिंघम अजय देवगन और सिंबा रणवीर सिंह.

Monday, January 13, 2020

إسقاط الطائرة الأوكرانية: خمسة أسباب وراء بقاء الأزمة الأمريكية الإيرانية متأججة

لم تتطور الأزمة التي أشعلها اغتيال الولايات المتحدة للقائد العسكري البارز، قاسم سليماني، إلى حرب شاملة.

وقد يعني هذا أنه كان هناك شيء من تخفيف التوتر.

ولكن العوامل الأساسية التي أفضت بالبلدين إلى بلوغ حافة الحرب لم تتغير. وفيما يلي أهم الأسباب التي تشير إلى أن الأزمة لم تنته بعد.

1- تخفيف التوتر مؤقت

ما يراه بعض المحللين تخفيفا للتوتر، ليس في الحقيقة كذلك.

فقد فعل قادة إيران، الذين صدمهم قتل سليماني في الصميم، ما استطاعوا فعله، وهو أن يردوا بقصف صاروخي. أرادت إيران أن ترد بضرب أهداف أمريكية، وأرادت أن يكون هذا واضحا. ولذلك أطلقت الصواريخ من أراضيها.

ولكن كانت هناك قيود عملية وسياسية على تصرف إيران. فقد أرادت أن تفعل شيئا بسرعة، لإعادة التوازن، ولم تسع إلى بدء حرب شاملة.

وما بدأته إيران - بحسب ما أوضحه كثير من المتحدثين الإيرانيين - لم ينته.

وقيل أيضا إن تحمل إيران لمسؤولية إسقاط طائرة ركاب أوكرانية هو مسعى آخر لتخفيف التوتر. لكن هذا غير صحيح.

كان رد إيران الطبيعي هو أن تنفي ضلوعها. ولكن عندما قالت الولايات المتحدة إن استخباراتها تؤكد العكس، وحينما عثر محققون أوكرانيون على دليل على ضرب صاروخ للطائرة، وعندما أثبت محققون مستقلون صدق مقطع فيديو يظهر إسقاط الطائرة، لم يكن أمام إيران أي مجال إلا التراجع.

وكان من الواضح بعد بدء الجرافات تنظيف المكان من بقايا حطام الطائرة، أن إيران أدركت تماما ما حدث. وإذا كان هناك أي شيء يشير إلى تعرض الطائرة لحادثة، لتركت السلطات الحطام في مكانه.

ويرجع إقرار طهران بالمسؤولية أكثر إلى مشكلاتها الداخلية. فقد شهدت البلاد قبل أشهر قليلة موجة احتجاجات على الفساد، والمعاناة من الاقتصاد المنهار.

وهكذا استؤنفت الاحتجاجات مرة أخرى من جديد. وهذا يعني أن الهدف هو الحد من مدى الأضرار في الداخل، وليس تخفيف التوتر مع الأمريكيين.

2- السياسة الأمريكية لم تتغير

لماذا اغتالت الولايات المتحدة سليماني، وحاولت أن تقتل مسؤولا إيرانيا كبيرا آخر في اليمن؟ قيل إنها فعلت ذلك، وربما يكون ذلك لأسباب قانونية، للحيلولة دون وقوع هجوم وشيك على المصالح الأمريكية.

ومن المحتمل أكثر أن هجمات واشنطن كانت محاولة لإعادة رسم خط واضح للردع. وقد يفيد ذلك على المدى القصير. إذ إن على إيران أن تقيس بدقة وبعناية ما ستقدم عليه من أفعال في المستقبل.

وفي الوقت نفسه، وبينما كان الرئيس دونالد ترامب يهدد بدمار إيران، فإنه لا يزال يشير أيضا إلى رغبته في الخروج من الشرق الأوسط. فهو يرى فيه مشكلة لا تهمه، بل قد تهم طرفا آخر. ولكن قد يؤدي هذا، لا محالة، إلى إضعاف قوة أي رسالة ردع.

وستواصل الولايات المتحدة شل الاقتصاد الإيراني. ولكن هذا لم ينجح في إجبار طهران على قبول التفاوض مذعنة. بل منحها الجرأة على رد الضربة، وبدء حملة لممارسة أقصى ضغط من جانبها.

وتسعى الولايات المتحدة إلى زيادة الضغط على طهران، وتقليص الموارد التي تنشرها في المنطقة إلى حد كبير. ولكن لا يحتمل أن تنجح في الأمرين معا.

3- أهداف إيران الاستراتيجية لا تزال كما هي

قد يكون الاقتصاد الإيراني يعاني من وطأة العقوبات، ويزداد شعور كثير من الإيرانيين بالضيق، ولكن يجب ألا ننسى أن النظام في طهران "نظام ثوري".

ولن يتخلى عن السلطة فجأة. إذ إن جماعات مثل الحرس الثوري الإيراني تتمتع بقوة ونفوذ كبيرين. وردها على أي معارضة في الداخل هو القمع، والمقاومة بشدة لأي ضغط من واشنطن في الخارج. وسوف يستمر هذا.

وهدف إيران الاستراتيجي هو إزاحة الولايات المتحدة من المنطقة، على الأقل من العراق، وقد يكون هذا قريبا من التحقق الآن أكثر بعد قتل سليماني.

وحققت سياسة طهران، من وجهة نظر السلطات الإيرانية على الأقل، كثيرا من النجاح الملحوظ. فقد أنقذت حكومة الرئيس بشار الأسد في سوريا، ومكنتها من فتح جبهة جديدة في مواجهة إسرائيل. كما أنها تتمتع بنفوذ كبير في العراق.

وبسبب تناقض سياسة الرئيس ترامب، يزداد شعور حلفاء الولايات المتحدة في المنطقة بأنهم أصبحوا وحدهم. وأخذ السعوديون يجرون، على مستوى منخفض، حوارا مع طهران، وبدأت تركيا تتخذ مسارا خاصا بها وتؤسس علاقة جديدة مع روسيا. ويبدو أن حكومة إسرائيل هي الوحيدة التي تفكر في أن قتل سليماني هو بداية مرحلة انخراط متجدد لترامب في المنطقة.

وتعاني الحكومة العراقية المؤقتة من أزمة بعد تعرضها لموجة احتجاج شعبي عليها. ويشعر كثير من الناس بالضيق من الوجود الأمريكي والنفوذ الإيراني في البلاد على حد سواء.

ووضعت موافقة البرلمان العراقي، غير الملزمة، على خروج القوات الأمريكية القضية بثبات على الأجندة السياسية. ولا يعني هذا أن القوات الأمريكية تتهيأ للانسحاب غدا، لكن إبقاءها سيحتاج إلى بعض المهارة الدبلوماسية.

وبدلا من ذلك هدد الرئيس ترامب بتجميد أموال الحكومة العراقية في البنوك الأمريكية، إذا أجبرت القوات الأمريكية على الخروج.

ودور الولايات المتحدة وانخراطها في العراق أمر مهم. وعندما بدأت قواتها مع الحلفاء قتال مسلحي تنظيم الدولة الإسلامية في العراق كان ينظر إلى وجودها هناك على أنه وجود طويل الأمد. وحتى بعد انهيار خلافة تنظيم الدولة، كان التوقع استمرار بقاء القوات الأمريكية لسنوات.

وإذا انسحبت تلك القوات، فسوف تكون مواجهة أي تمرد من قبل تنظيم الدولة أصعب. وسوف يجعل هذا من الوجود الأمريكي في شرق سوريا أمرا غير مبرر، لأن ذلك الوجود تسانده قواعد الولايات المتحدة في العراق. وما الجدل بشأن وجود القوات الأمريكية إلا بداية، وإذا خسرت الولايات المتحدة تلك الجولة، فإن هذا يعني فوز إيران فيها.